जोशीमठ आपदा : सिंहधार वार्ड में ढहा पुश्तैनी मकान

जोशीमठ। सीमांत नगर जोशीमठ के सिंहधार वार्ड में गुरुवार को एक बड़ा हादसा होते-होते बचा, जब लंबे समय से दरारों की मार झेल रहा मोहनलाल का पुश्तैनी पत्थर का भवन अचानक भरभराकर ढह गया। घटना दोपहर की है जब मकान का आधा हिस्सा अचानक गिर गया, जिसमें मोहनलाल, उनकी पत्नी मुन्नी देवी, देवर संतोष कुमार और पुत्र आयुष निवास करते थे। गनीमत रही कि हादसे के समय परिवार के सदस्य मलबे की चपेट में आने से बाल-बाल बच गए। गृहस्वामी मोहनलाल ने रुंधे गले से बताया कि वर्ष 2023 की भू-धंसाव आपदा के बाद से ही उनके घर में खतरनाक दरारें आ चुकी थीं, जिसकी सूचना उन्होंने कई बार शासन-प्रशासन को लिखित रूप में दी और नए भवन की मांग की, लेकिन ठोस कार्रवाई न होने का नतीजा आज घर के टूटने के रूप में सामने आया है।

घटना की सूचना मिलते ही ‘जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति’ के संयोजक और सामाजिक कार्यकर्ता अतुल सती ने मौके पर पहुँचकर स्थिति का जायजा लिया और सरकार के खिलाफ कड़ा रोष व्यक्त किया। ढह चुके भवन के मलबे के सामने खड़े होकर सती ने वीडियो के माध्यम से जोशीमठ की वर्तमान भयावह स्थिति को उजागर करते हुए कहा कि प्रशासन की घोर अनदेखी के कारण आज एक गरीब का आशियाना जमींदोज हो गया। उन्होंने तीखे सवाल दागते हुए कहा कि आपदा के इतने लंबे समय बाद भी न तो प्रभावितों का मुआवजा तय हो पाया है और न ही उनके स्थायी पुनर्वास की कोई योजना धरातल पर दिखी है। सती ने चेतावनी दी कि जोशीमठ में ऐसे दर्जनों जर्जर मकान हैं जहाँ लोग मुआवजे के अभाव में अपनी जान हथेली पर रखकर रहने को मजबूर हैं। यदि मानसून से पहले इन परिवारों के लिए पक्की व्यवस्था नहीं की गई, तो ऐसे हादसों में भारी जनहानि हो सकती है।

हादसे के बाद तहसील प्रशासन की टीम ने सक्रियता दिखाते हुए प्रभावित परिवार को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया है। राज्य आपदा प्रबंधन सलाहकार विवेक तिवारी ने बताया कि मकान ढहने की सूचना मिलते ही प्रशासन की टीम मौके पर पहुँची और त्वरित कार्रवाई करते हुए परिवार को सिंहधार स्थित बैरिकेड हाउस में ठहराया गया है। इस दौरान राजस्व निरीक्षक के. बटोला और राजस्व उप-निरीक्षक सीती रोतियाल ने मौके पर पहुंचकर नुकसान का आकलन किया और प्रभावितों को हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। हालांकि, संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया है कि केवल अस्थायी शिफ्टिंग समाधान नहीं है, प्रशासन को कागजी खानापूर्ति छोड़कर प्रभावितों को तत्काल उचित मुआवजा और सुरक्षित विस्थापन की सुविधा प्रदान करनी चाहिए।

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