आरटीआई अपील में लापरवाही पर सूचना आयुक्त दलीप सिंह कुँवर का कड़ा रुख, डीएम देहरादून को दिए तहसीलदार ऋषिकेश पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश

देहरादून। उत्तराखण्ड सूचना आयोग ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) से जुड़े एक मामले में सख्त रुख अपनाते हुए तहसील ऋषिकेश के विभागीय अपीलीय अधिकारी और तहसीलदार के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। आयोग ने जिलाधिकारी देहरादून को निर्देशित किया है कि संबंधित अधिकारी से स्पष्टीकरण लेकर उनके विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

मामला ऋषिकेश निवासी हिमालय पाण्डे द्वारा मांगी गई सूचना से संबंधित है। उन्होंने 1 अगस्त 2025 को तहसील ऋषिकेश के लोक सूचना अधिकारी को आवेदन देकर तीन बिंदुओं पर सूचना मांगी थी। इस पर एमजे न्यायालय ऋषिकेश द्वारा 23 अगस्त 2025 को सूचना उपलब्ध कराई गई, लेकिन उपलब्ध कराई गई सूचना से असंतुष्ट होकर आवेदक ने 9 सितंबर 2025 को विभागीय अपील दायर की।

आयोग में दायर हुई द्वितीय अपील

विभागीय अपील का समय पर निस्तारण न होने के कारण आवेदक ने 6 नवंबर 2025 को उत्तराखण्ड सूचना आयोग में द्वितीय अपील दायर की, जो 10 नवंबर 2025 को पंजीकृत हुई। मामले की सुनवाई 27 मार्च 2026 को राज्य सूचना आयुक्त दलीप सिंह कुँवर की अध्यक्षता में हुई। सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि आवेदक द्वारा दाखिल-खारिज के लिए भेजे गए प्रार्थना पत्र के तहसील कार्यालय में प्राप्त होने या न होने की जानकारी देने के लिए आवश्यक खोजबीन नहीं की गई।

15 दिन में कार्रवाई की जानकारी देने के निर्देश

आयोग ने लोक सूचना अधिकारी एवं मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, तहसील ऋषिकेश को निर्देश दिया कि अपीलार्थी द्वारा भेजे गए दाखिल-खारिज संबंधी पत्र की खोजबीन कर 15 दिनों के भीतर की गई कार्रवाई से अपीलार्थी को अवगत कराया जाए।

अपील के निस्तारण में हुई गंभीर लापरवाही

आयोग ने पाया कि विभागीय अपीलीय अधिकारी तहसीलदार चमन सिंह ने अपील का समय पर निस्तारण नहीं किया और केवल सुनवाई का नोटिस जारी किया। आयोग का नोटिस मिलने के बाद 13 मार्च 2026 को अपील का निस्तारण किया गया, जिसे आयोग ने आरटीआई अधिनियम और शासनादेशों के उल्लंघन के रूप में गंभीर लापरवाही माना।

जिलाधिकारी को कार्रवाई के निर्देश

आयोग ने आदेश की प्रति जिलाधिकारी देहरादून को भेजते हुए निर्देश दिया कि संबंधित अधिकारी की त्रुटियों का संज्ञान लेकर उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त किया जाए और आवश्यक विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में सूचना का अधिकार अधिनियम का सही तरीके से पालन सुनिश्चित हो सके।

सुनवाई के दौरान आयोग ने अपीलार्थी को दाखिल-खारिज की प्रक्रिया के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी और बताया कि इस प्रक्रिया में बैनामे की मूल प्रति संलग्न करना आवश्यक होता है।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आदेश का पालन नहीं किया जाता है तो अपीलार्थी सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 18(1) के तहत आयोग में शिकायत दर्ज करा सकता है।

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