मूल निवास 1950 और सख्त भू-कानून के बिना नहीं बचेगी उत्तराखंड की पहचान – पूरण सिंह भंडारी

कोटद्वार। उत्तराखण्ड विकास पार्टी ने गढ़वाली कुमाऊँनी भाषा संस्कृति और समाज को बचाने के लिये मूल निवास 1950 और सख्त भू कानून बनाने की बात की। उत्तराखण्ड विकास पार्टी के उपाध्यक्ष पूरण सिंह भंडारी ने कहा कि भाजपा और कांग्रेस ने गढ़वाली कुमाऊँनी भाषा संस्कृति और समाज के विकास के लिये इन छब्बीस सालों में एक कदम नहीं उठाया उल्टे ही नये कानून बना कर मूल निवासियों के हक हकूकों पर डाका डाल दिया।

पूरण सिंह भंडारी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में गढ़वाली कुमाऊँनी समाज को मूल निवास प्रमाण पत्र तो मिलता ही था साथ ही पर्वतीय क्षेत्र की विषमता को देखते हुये नौकरियों में विशेष आरक्षण की व्यवस्था थी, मगर उत्तराखण्ड बनने के बाद पर्वतीय क्षेत्र का आरक्षण तो खत्म हुआ ही मूल निवास भी खत्म कर दिया गया।

पूरण सिंह भंडारी ने कहा है कि भाजपा कांग्रेस ने गढ़वाली कुमाऊँनी समाज को केवल छला है और दिल्ली नागपुर के इशारों पर नियम कानून बना कर उत्तराखण्ड की बेशकीमती संपतियों को लुटा दिया है, यहाँ तक कि प्रॉफिट दे रही सार्वजनिक उपक्रम की कंपनियों तक को बेच दिया गया है।

उन्होंने कहा कि उधम सिंह नगर और हरिद्वार की बेशकीमती जमीनें बाहरी लोगों के द्वारा साम दाम दंड से खरीद ली गई हैं और वहाँ के मूल निवासियों को मजबूरन दिहाड़ी मजदूर बनाने की कोशिश की जा रही है।

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